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This page was last updated on 31 May, 2007


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Yoni se pani aana:
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क्या आप एक माँ के रूप में अन्य माताओं से शब्दों या तस्वीरों के माध्यम से अपने अनुभव बांटना चाहती हैं? अगर हाँ, तो माताओं के संयुक्त संगठन का हिस्सा बने. सफ़ेद पानी गाढ़ा और पीला हो पर उसमे बहुत अधिक बदबू हो।. यहाँ क्लिक करें और हम आपसे संपर्क करेंगे. इसके अलावा बहुत जरूरी हैं कि आपको अपनी योनि से गिरने वाले सफ़ेद पानी के रंग और गंध का पूरा ध्यान रखे। अगर आपके मन में किसी भी प्रकार की शंका या सवाल हो या फिर शरीर में कुछ असामान्य परेशानी है तो डॉक्टर से मिले। यदि पानी पतला या कुछ गाढ़ा या फिर गंधहीन हो तो कोई दिक्कत की बात नहीं,पर अगर कुछ और परेशानी हो जिससे आपको लगे की इसका रंग और गंध अलग है तो आप अपने डॉक्टर से बिना किसी देरी के तुरंत मिले। प्रेगनेंसी के दौरान सफेद पानी आना अगर ज्यादा हो तो डॉक्टर के पास जाने से परहेज ना करें।. मैं से माँ तक का सफर- कितना मुश्किल कितना आसान. #७. अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखे, साथ ही समय पर डॉक्टर द्वारा दिये गए दवाइयो को ले।. योनि का डिस्चार्ज असामान्य, बदबूदार के साथ-साथ पेशाब करने में भी तकलीफ हो और बुखार आए तो।. गर्भवती होना हर महिला के लिए एक उपहार से कम नहीं होता। और ये एक ऐसा अनुभव है जिसमे कई प्रकार के बदलाव होते है जैसे की हारमोन का बदलाव होना, वजन बढ़ना, मानसिक प्रभाव पड़ना, डिहाइड्रेसन इत्यादि। ऐसे ही बदलावों में से एक है गर्भावस्था में सफ़ेद पानी आना (pregnancy me safed pani aana)। गर्भवती महिला के लिए सफ़ेद पानी निकालना अच्छा होता है क्योंकि इस पानी में मृत कोशिकाएं होती है और ये आपकी योनि को साफ सुथरा और इससे होने वाली समस्याओं जैसे की बैक्टीरिया से मुक्त करने में मदद करती है। आइयें जानें गर्भावस्था में सफेद पानी आने के कारण (Reason of White Water During Pregnancy) और यह कब आना सुरक्षित है।. अगर योनि से पानी सफ़ेद निकल रहा हो पर पेशाब करते वक्त दर्द और जलन महसूस हो तो तुरंत राय लेने की आवश्यकता है।. #६. सिल्क और नाइलोन के कपड़े पहनना छोड़े और रात को हल्के कपड़े पहन कर सोये।. गर्भावस्था के आखिरी में पानी आना ये संकेत देता है की आपका शरीर बच्चे को जन्म देने के लिए खुद को तैयार कर रहा। यदि प्रसव से कुछ दिन पहले या समय से पहले आपको पेशाब जैसा पतला पढ़ार्थ निकलता है तो डरने की बात नहीं होती, ये amniotic fluid का लीकेज होता है जिससे पता चलता है कि अब आप अस्पताल जाने के लिए तैयार है।. जब पानी हरे रंग का हो और उसकी गंध मछ्ली के जैसी हो।. इस समय पानी पतला और रंगहीन होता है पर जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता है ये कुछ गाढ़ा जैसे होने लगता है। अगर आपको लगता है की इसके लक्षण भिन्न या असामान्य दिखाई दे रहे है तो आप अपने डॉक्टर से राय ले।. #३. साफ सूथरे और हल्के सूती अंडरवियर का प्रयोग करे और उन्हे समय-समय पर बदलते रहे।. कुछ जरूरी टिप्स जो हर महिलाओ को गर्भावस्था के दौरान अपनानी चाहिए जिससे आप ये परेशानियो से दूर रह सकती है-. #४. कोई भी प्रकार के खुशबू दार या आर्टिफ़िश्यल क्रीम, पाउडर, स्प्रे या लोशन का प्रयोग अपने गुप्त अंगो पर न करे।. अगर योनि से पानी झाग जैसा हरा और बदबूदार हो. दूसरी तिमाही में गर्भावस्था में सफेद स्राव का पानी थोड़ा गाढ़ा और गंधहीन एवं सामान्य रंग का है तो चिंता करने की कोई बात नहीं। लेकिन अगर इसमे किसी प्रकार का खून आए तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करे।. गर्भावस्था के दौरान बालों के टूटने के कारण, बचाव व घरेलु उपाय. #५. पेड्स का उपयोग भी कर सकती है अगर आपको इससे परेशानी हो और आप सामान्य नहीं हो पा रही।. NOTE: इसके अलावा यदि ३७ सप्ताह से पहले यदि आपको अधिक मात्रा में पानी जैसा स्त्राव (White Discharge) दिखे तो डॉक्टर से मिले क्योंकि यह amniotic sac में छेद या फटने का लक्षण भी हो सकता है इसका अर्थ है की आपका बच्चा गर्भाशय में सुरक्षित नहीं है।. इस सप्ताह के दौरान पहले से पानी का रंग और गाढ़ापन थोड़ा ज्यादा रहेगा। हो सकता है कि गर्भावस्था के आखरी हफ़्तों में पानी के साथ खून आए जो की सामान्य है। इसमे कभी स्त्राव के साथ खून के थक्के भी आ सकते है।. Disclaimer: We believe in "Vasudhaiv Kutumbakam" (entire humanity is my own family). "Love all, hate none" is one of our slogans. Striving for world peace is one of our objectives. For us, entire humanity is one single family without any artificial discrimination on basis of caste, gender, region and religion. By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings. We only refer to interpretations made by fanatics and terrorists to justify their kill and rape. We highly respect the original Quran, Hadiths and their creators. We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models. Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism. For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts. Please read Full Disclaimer. Vedas are Apaurusheya, There's NO History in Them. I am founder of Agniveer. Pursuing Karma Yog. I am an alumnus of IIT-IIM and hence try to find my humble ways to repay for the most wonderful educational experience that my nation gifted me with. I am also on Quora. @Umakant Good question. …these answers are not provided by any religion I have read the answer of Agniveer. …and I must say I was unsatisfied. .though I didn't expect a satisfactory answer to this question The answer to your question cannot be answered by either the vedas or Agniveer or anybody else. ..only ishwar (if there is one) can answer this Unfortunately Arjun had that chance with Lord krishna. ..he didn't do it Nachiketa had that oppurtunity. …..he however used it ask about OM instead. "वह तेजस्वियों का तेज, बलियों का बल, ज्ञानियों का ज्ञान, मुनियों का तप, कवियों का रस, ऋषियों का गाम्भीर्य और बालक की हंसी में विराजमान है। ऋषि के मन्त्र गान और बालक की निष्कपट हंसी उसे एक जैसे ही प्रिय हैं। वह शब्द नहीं भाव पढता है, होंठ नहीं हृदय देखता है, वह मंदिर में नहीं, मस्जिद में नहीं, प्रेम करने वाले के हृदय में रहता है। बुद्धिमानों की बुद्धियों के लिए वह पहेली है पर एक निष्कपट मासूम को वह सदा उपलब्ध है। वह कुछ अलग ही है। पैसे से वह मिलता नहीं और प्रेम रखने वालों को कभी छोड़ता नहीं। उसे डरने वाले पसंद नहीं, प्रेम करने वाले पसंद हैं। वह ईश्वर है, सबसे अलग पर सबमें रहता है। यही वैदिक हिन्दू धर्म है। इसी धर्म पर हमें गर्व है।". आदरणीय अग्नीवीरजी, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की, आत्मा का (Soul,रूह, ) कोई धर्म नहीं होता है, शरीर का धर्म होता है,धर्म के रिवाज से मृत शरीर जलाया या दफनाया जाता है, जब आत्मा शरीर धारण करती है और आत्मा को किसी परिवार या व्यक्ति से पिछले जन्म का हिसाब किताब ( लेंन देंन ) के कारण उसे उस धर्म या परिवार मे जन्म लेना पड़ता है, आत्मा जिस धर्म में पैदा होती है उसी धर्म का संस्कार उस आत्मा में बचपन से ही पड जाता है, इसीकारण वह अन्य धर्म की बाते आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता है, ईश्वर ने इस सृष्टी नाटक रंग मच पर समय– समय पर आज जितने भी धर्म सस्थापक ( पैगम्बर ) भेजे उन्होंने मनुष्य को कैसा सुखमय जीवन जीना चाहिए,उन नैतिक मूल्योंकी पालना करने की हमें शिक्षा दी,उन को जीवन में धारण करना ही धर्म का नाम है, हर कोई धर्म ने अच्छी ही शिक्षा दी है, और वह धर्म की शिक्षाये उस समय के काल और स्थान अनुसार थी, साथ -साथ ईश्वर का परिचय भी दिया गया परन्तु सब ने ईश्वर को पूर्ण रीति से नहीं जाना, जैसे चार सूरदास (दृष्टी हीन ) को हाथी के अलग -अलग अंग पर खड़ा किया और कहा गया की, हाथी कैसा है,जो हाथी के पुंछ के पास था उसने कहा की, हाथी साफ जैसा है, जो हाथी के कान के पास था उसने कहा की हाथी सूफ जैसा है,जो हाथी के पाँव के पास था उसने कहा की हाथी स्तंभ जैसा है,जो हाथी के सूंड के पास था उसने कहा की हाथी पेड़ जैसा है,सभी ने अपने अपने स्पर्श अनुभव से ठीक कहा लेकिन सबकी बाते मिलकर हाथी का आकार पूर्ण होता था,ठीक उसी प्रकार सब धर्म की बाते सुनकर ही हम परमात्मा को अच्छी तरह जान सकते है, सर्व धर्माणी परित्यजेत् मामेकं शरणम व्रज -गीता अ. १८,श्लोक ६६ अर्थात ईश्वर ने ज्ञान अर्जन करने वाले हम सभी अर्जुन ( पार्थ अर्थात पृथ्वीपर पैदा हुए सभी पृथ्वी पुत्र) को उद्देश देते हुए कहा की, सब धर्म और धर्म की एवं शास्त्र, की बाते छोड़ उसमे तेरा समय जायेगा,अब मै स्वयं सब शास्त्र का सार सुनाता हु, तू मेरे शरण में आ I माम् च यो ऽ व्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते I स गुणांसमतिर्येता नब्रह्मभुयाय कल्पते I I २६ I I गीता अ. १४ जो केवल मेरी ही अव्यभिचारी भक्ति करता है (अव्यभिचारी अर्थात केवल एक परमात्माकी,व्यभिचारी अर्थात सभी देवताओं की ) वह प्रकृति के ( माया से )भी पार होकर वह ब्रम्हस्तर प्राप्त होनेमें. . LIKED THE POST? CLICK TO GIFT AND HELP REVIVE DHARMA. It's answer is Adwait. Non-duality. God wishes to experience himself by creating duality in his own mind. Duality is just illusion. Mera prashn ye he ki Pruthvi par hamesa SATYUG hi kyo nai rah sakta Yaha kalyug kyu aata he.?? [. ] article is also available in Hindi at. भारत ऐसा अविनाशी खंड है, जहाँ स्वयं भगवान का अवतरण होता है,गर्भ से जन्म नही होता है या न कोई अवतार लेते है बल्कि मनुष्य तन का आधार लेते है जिसे भगवान स्वयं ब्रम्हा नाम रखते है, कलियुग में पतित आत्माओं को परमात्मा दिव्य ज्ञान ( श्रीमत ) ब्रम्हा तन का आधार ( माध्यम ) ले के देते है, कलियुग के अंत में भगवान की श्रीमत द्वारा आत्माओं मे फिरसे अच्छे संस्कार भरे जाते है,जो आत्माए योगबल से फिर सारी शक्तियां प्राप्त कर ( दिव्य गुणों को धारण कर ) फ़िर से सतयुग मे दिव्यात्मा ( देवता ) के रूप में जन्म लेते है, सतयुग को कहा जाता है, स्वर्ग, नई दुनिया (बहिश्त),पैराडाइस धरती पर, सतयुगमे सिर्फ ९ लाख आत्माये जन्म लेती है, त्रेता युग तक उन दिव्य आत्माओं की संख्या ३३ करोड़ तक पहुँचती है, यहाँ के समय तक आनेवाली आत्माए देवता कहलाती है जो दिव्य गुणों वाली श्रेष्ठ आत्माए है वह भी सिर्फ भारत में जन्म लेती है ( इसलिए भारत में ३३ करोड़ देवी– देवता का गायन है ) सबसे पहले परमात्मा ने ब्रम्हा द्वारा सतयुग में अर्थात भारत में ही स्वर्ग की स्थापना की है, अन्य किसी भी खंड पर नहीं । आदि सनातन हिन्दू देवी– देवता धर्म सबसे पुराना धर्म है परन्तु पुनर्जन्म लेते -लेते और विकारो मे गिरने के कारण तथा पतित होने के कारण सिर्फ हिन्दू कहलाने लगे, ( यहाँ धर्म अर्थात दिव्य गुणों की धारणा करने वाले ) जहा स्वयं परमात्मा का अवतरण होता है और दिव्य गुणों वाली आत्माओं का जन्म होता है उस धरती को आज हम भारत माता ( वन्दे मातरम) कहते है बाकी सारे पृथ्वी पर किसी भी देश को माँ का संबोधन नहीं करते है इसलिये भारत पहले सोने की चिड़िया था कहते थे, हिन्दू धर्म सबसे पुराना होने से इसके संस्थापक स्वयं भगवान हैं यह हम भूल गए है बाकि अन्य धर्म अलग– अलग खंड पर अलग– अलग धर्म संस्थापक द्वारा स्थापित हुए, जैसे आज से लगभग २५०० वर्ष पहले इब्राहिम ने इस्लाम धर्म स्थापित किया,लगभग २२५० वर्ष पूर्व महात्मा गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म स्थापित किया, लगभग २००० वर्ष पूर्व ईसा ने ईसाई धर्म स्थापित किया,१५०० वर्ष पूर्व शंकराचार्य ने कर्म- सन्यास सम्प्रदाय स्थापन किया और कोई १४०० वर्ष पूर्व मुहमद पैंगबर जी ने मुसलमान धर्म स्थापित किया, इसी प्रकार अन्य आत्माए भी अपने पूर्व जन्म के संस्कार अनुसार उन धर्म में आती गई, आज अनेक भाषाएँ तथा. . Previous article Personality Development and Character Building for youth- Session with Agniveer. टिपण्णी: यहाँ 'ईश्वर' से हमारा तात्पर्य है "परम सत्ता " न कि 'देवता' । 'देवता' एक अलग शब्द है जिसका अशुद्ध प्रयोग अधिकतर 'परमसत्ता' के लिए कर लिया जाता है। हालाँकि ईश्वर भी एक 'देवता' है। कोई भी पदार्थ– जड़ व चेतन– जो कि हमारे लिए उपयोगी हो व सहायक हो, उसे 'देवता' कहा जाता है । किन्तु उसका अर्थ यह नहीं है कि हर कोई ऐसी सत्ता ईश्वर है और उसकी उपासना की जाये । कोई भ्रम न हो इसलिए इस लेख में हम 'ईश्वर' शब्द का प्रयोग करेंगे । वह परम पुरुष जो निस्वार्थता का प्रतीक है, जो सारे संसार को नियंत्रण में रखता है, हर जगह मौजूद है और सब देवताओं का भी देवता है, एक मात्र वही सुख देने वाला है । जो उसे नहीं समझते वो दुःख में डूबे रहते हैं, और जो उसे अनुभव कर लेते हैं, मुक्ति सुख को पाते हैं । (ऋग्वेद 1.164.39) प्रश्न: वेदों में कितने ईश्वर हैं? हमने सुना है कि वेदों में अनेक ईश्वर हैं । उत्तर: आपने गलत स्थानों से सुना है । वेदों में स्पष्ट कहा है कि एक और केवल एक ईश्वर है । और वेद में एक भी ऐसा मंत्र नहीं है जिसका कि यह अर्थ निकाला जा सके कि ईश्वर अनेक हैं । और सिर्फ इतना ही नहीं वेद इस बात का भी खंडन करते हैं कि आपके और ईश्वर के बीच में अभिकर्ता (एजेंट) की तरह काम करने के लिए पैगम्बर, मसीहा या अवतार की जरूरत होती है । मोटे तौर पर यदि समानता देखी जाये तो: इस्लाम में शहादा का जो पहला भाग है उसे लिया जाये: ला इलाहा इल्लल्लाह (सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह के सिवाय कोई और ईश्वर नहीं है ) और दूसरे भाग को छोड़ दिया जाये: मुहम्मदुर रसूलल्लाह (मुहम्मद अल्लाह का पैगम्बर है ), तो यह वैदिक ईश्वर की ही मान्यता के समान है । इस्लाम में अल्लाह को छोड़कर और किसी को भी पूजना शिर्क (सबसे बड़ा पाप ) माना जाता है । अगर इसी मान्यता को और आगे देखें और अल्लाह के सिवाय और किसी मुहम्मद या गब्रेइल को मानाने से इंकार कर दें तो आप वेदों के अनुसार महापाप से बच जायेंगे । प्रश्न: वेदों में वर्णित विभिन्न देवताओं या ईश्वरों के बारे में आप क्या कहेंगे? 33 करोड़ देवताओं के बारे में क्या? उत्तर: 1. जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है जो पदार्थ हमारे लिए उपयोगी होते हैं वो देवता कहलाते हैं । लेकिन वेदों में ऐसा कहीं नहीं कहा गया कि हमे उनकी उपासना करनी चाहिए । ईश्वर देवताओं का भी देवता है और इसीलिए वह महादेव कहलाता है, सिर्फ और सिर्फ उसी की ही उपासना करनी चाहिए । 2. वेदों में 33. समर्थ है I आज हमें जरुरत है की, हर मजहब की बातों को गहनता से समझ उसके सार (एसेन्स ) को समझ,ज्ञान को जीवन में धारण करे,ईश्वर ने हमें सबसे बड़ा उपहार दिया है बुद्धि इस बड़े ज्ञानसागर में डुबकी लगाकर गहराई में उतरकर खोजे तो हमें ज्ञान मोती सहज ही प्राप्त होंगे,मूल बात यह है की,क्या परमात्मा सर्वज्ञ है और सर्वव्यापी है ?जिसे हम ईश्वर, अल्लाह परमात्मा, गॉड,सुप्रीम सोल,ऑलमाइटी अथॉरिटी,निराकारी,निर्विकारी,अभोक्ता,जन्म -मरण रहित मुल बीज रूप, सर्व शक्तिमान,ज्ञान सागर,प्रेम सागर,आनंद सागर सुख सागर,शांति सागर, ग्रेट ग्रेट ग्रैंडफादर कहते है, सर्वमे व्याप्त अर्थात कण कण में भगवान हर चीज में भगवान, हम उसे इसीकारण एक का अनेक भगवान कर दिया है उसके अवतार मानने लगे है,वराह,कुर्म, मत्स्य, नरसिंह क्या ईश्वर जानवरो के अवतार लेते है,फिर हमने जिसकी मदत मिली या डर लगा उसे ईश्वर मान लिया या ईश्वर के पास बिठा दिया जैसे हाथी,सिह,सॉफ,बैल,चूहा,सूर्य तारे,चाँद को भी ईश्वर माना,हम भक्ति में इतने गिरते गए की, हम गुरु, माता -पिता,धर्म सस्थापक, पेड़,पत्थर,आदि को भी ईश्वर समझ लिया फिर तो 27 नक्षत्र,आदि को भी ईश्वर समझने लगे हम उस एक को भूल गए और ईश्वर को अनेकता में ला दिया यही सबसे बड़ी भूल है की, हमने उसे सर्वव्यापी बना दिया और हर चीज में उसे ठोक दिया,अब आप कहे यह उसकी महिमा है की ग्लानि क्या परमात्मा पेड़ के हर पत्ते को भी हिलाते रहता है, जिसमे चेतना है,उसको दूसरा कोई काम नहीं है, सब जड़ चेतन में ईश्वर है, अगर वह सबमे रहे तो उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व कहा रहा, परमात्माका स्वतंत्र स्वरुप अर्थात अतिसुष्म ज्योतिर्बिंदु है लेकिन सर्वशक्तिमान भी है, कविं पुराण मनुशसितारमणो रनियांसमनुस्मरेधः I सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्ण तमसः परस्तात I I ९ I I गीता अध्याय ८ अर्थात,मै सर्वज्ञ हूँ जो मुझे सभी जानते है,सारे धरतीपर मेरा अनुशासन है मै अणु से भी अति सुष्म ज्योतिर्बिंदु हुँ, जो मै सबका पालनहार हुँ मेरा स्वरुप बुद्धि के तर्क से बाहर है,मैं सूर्य के समान तेजोमय हूँ (यहाँ सूर्य समान कहा है अर्थात सूर्य नहीं पर सूर्य की रौशनी जैसा प्रकाशमय हूँ ), मै इस अंधकार रूपी प्रकृति से भी परे हूँ, इसका हि ध्यान मनुष्य ने करना चाहिये I हम आत्माए महान काम करके वाले. . question—-Iswar hai kon. Wo aadmi hai ya aurat hai.ya fir koi aur. Usne humhe racha hai par kyo. kyo hume iswar ki aaradhana karni chahiye. ye to ek swarth ka rista ho gya ki hum uski aaradhana kare aur wo humhe uska fal de. Kyo usne ye le ne dene ka chhakkr chalaya. …. .. . This post is also available in Gujarati at. महात्मा,दिव्या गुणों वाले दिव्यात्मा,पुण्य कर्म करने वाले पुण्यात्मा, देने वाले देवता,या पाप कर्म करने वाले पापात्मा,दॄष्टात्मा बन सकते है लेकिन परमात्मा नहीं,परमात्मा तो केवल एक की ही महिमा है,आत्मा सो परमात्मा कहना भी गलत है, आत्मा और परमात्मा की महिमा अलग है, ततत्व असि– छान्दोग्योपनिषद– अर्थात,वह तुम हो या अहंब्रम्हाश्मि– बृहदारण्यकोपनिषद अर्थात मै ही ब्रम्ह हुँ,( यह गलत नहीं है ),वह तुम हो अर्थात सतयुग में तुम ने अच्छे कर्म कर १६ कला संपूर्ण देवता बने थे फिर जन्म-जन्म विकारों मे कलियुग तक आते- आते गिरते गए,अब अच्छा पुरुषार्थ कर फिर से तुम्हे देवता बनना है जो पहले तूम ही थे यह बात परमात्मा ने आत्मा को कही है I जब आत्मा अपनी योग साधना से दिव्य दॄष्टि द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार कर लेता है तब आत्मा सब बन्धनोंसे मुकत अनुभव करती है अर्थात विश्व बंधुत्व की भावना जागती है Iॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अर्थात 1: Om, May All become Happy, 2: May All be Free from Illness. 3: May All See what is Auspicious, 4: May no one Suffer. 5: Om Peace, Peace, Peace. सारा संसार ही मेरा परिवार है अब मुझमें में और इस ब्रम्ह में कोई अंतर नहीं है परमात्माके दिव्य गुण आनेसे एक ऐसी स्थितिः को अहंब्रम्हाश्मि कहा जाता है एक आत्मा / परमात्मा अलग- अलग चीज में कैसे रह सकती है ( दो शरीर में एक आत्मा कैसे हो सकती है अगर एक में रहे तो दूसरा शरीर मृत हो जायेगा सब में एक ही सोल / सुप्रीम सोल नहीं रह सकती है या चेतन नहीं रख सकती है परमात्मा के अधीन संसार है,संसार में परमात्मा नहीं प्रकृति स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुन रश्न- कृपया ईश्वर के मुख्य गुणों को संक्षेप में बताएं । उत्तर- उसके गुण अनंत हैं और शब्दों में वर्णन नहीं किये जा सकते । फिर भी कुछ मुख्या गुण इस प्रकार हैं: 1. उसका अस्तित्व है । 2. वह चेतन है । 3. वह सब सुखों और आनंद का स्रोत है । 4. वह निराकार है । 5. वह अपरिवर्तनीय है । 6. वह सर्वशक्तिमान है । 7. वह न्यायकारी है । 8. वह दयालु है । 9. वह अजन्मा है । 10.वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता । 11. वह अनंत है । 12. वह सर्वव्यापक है । 13. वह सब से रहित है । 14. उसका देश अथवा काल की अपेक्षा से कोई आदि अथवा अंत नहीं है । 15. वह अनुपम है । 16. वह संपूर्ण सृष्टि का पालन करता है । 17. वह सृष्टि की उत्पत्ति करता है । 18. वह सब कुछ जानता है। 19. उसका कभी क्षय नहीं होता, वह सदैव परिपूर्ण है । 20. उसको किसी का भय नहीं है । 21. वह शुद्धस्वरूप है । 22. उसके कोई अभिकर्ता (एजेंट) नहीं है । उसका सभी जीवों के साथ सीधा सम्बन्ध है।. Hi Main yeh janna chahta hu ki jab shrishti ki rachna Brahma ne ki hai to sabhi devi devta rishi muni yogi aadi keval Bharat me hi kyu hue. Ye Islam air Christian dharm aadi videsh kyu hue. Please koi mujhe reply de. shri krishan hi puran parmatmaa par barhmaa hai wa hi sab kuj hai aap bramaavarvat puran pada main kuj nahi kaho ga yeh hi nirakar ishwar sawroop hai inmaa vishu shiv barhmaa main kio anter nahi hai inhona nirakar sa akar roop parpat kiya taki ki hum inko jaan sakaa yaha tak ki ya hamar beech bi aata hai jab bi darti par julam hota hai yah hi jyoti hai main kio tark nahi karna chata hindu darm sab sa pahala darm hai is main hi sara darmo ki utpati hui hai jaisa sankrit si sari lang nikli hai.